Categories
Motivation

हाथरस की बेटी

विकास की परिभाषाएँ बदल रही है
करवटें और हवाऐं बदल रही है

खिलखिलाती थी कल तक ऑगन में वो
अंधेरों में अब चिंताऐं जल रही है

ईमान भी ख़ामोश है मेरी मिट्टी की वफ़ा का
ऑंखें नम हो रही है और रूह जल रही है

ख़ामोश कर देगें सब इंकलाब की आवाज़ें
यहॉ राम राज की सरकारें चल रही है

कोई तो देख लो इन नक़ाबों को
झूठ के पुलिन्दों को , झूठे ख़्वाबों को

यक़ीन न हो तो उस कटी जुबान से पुछना
जिसे कहना बहुत था कि दर्द बहुत था

थक गईं हूँ मैं अब सोना चाहती हूँ
मेरे देशभक्तों ! मैं रोना चाहती हूँ

अगर ऐतबार हो तो मॉ को देखना
झाइयों में छुपी तन्हाईयो को देखना
मेरी आबरू लुट गई हो मगर
मेरी रूह में थोड़ी सी जान बाकि है

जिस्म ख़ाक हो गया हो मगर
इंसाफ़ का आज भी इंतज़ार बाकि है ।

ईमान भी ख़ामोश है मेरी मिट्टी की वफ़ा का
ऑखे नम हो रही है और रूह जल रही है …..।।

By The Lost Monk

Writer || Poet || Explorer || Photographer || Engineer || Corporate Investigator || Motivator

3 replies on “हाथरस की बेटी”

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s